किताब!

आज मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि श्री नन्द चतुर्वेदी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| श्री चतुर्वेदी जी की कविता मैं आज पहली बार शेयर कर रहा हूँ|   

लीजिए आज प्रस्तुत है श्री नन्द चतुर्वेदी जी की यह कविता

उस तरह मैं नहीं पढ़ सका
जिस तरह चाहिए
इस किताब में लिखी इबारत

यह किताब जैसी भी बनी हो
जिस किसी भी भाषा में लिखी गयी हो
लेकिन जब कभी पढ़ी जाएगी
बहुत कुछ विलुप्त हो जाएगा

मैं ही कभी
गा-गा कर पढ़ने लगूँगा
कभी अटक-अटक कर
मैं ही बदल दूगाँ
उद्दण्डतापूर्वक कभी कुछ

हँसने लगूँगा
इस तरह के शब्दों के
हिज्जे लिखी देखकर

बहरहाल उस तरह नहीं पढूँगा
जिस तरह चाहीए

बदल-बदल कर पढ़ने से
किताब का कुछ भी नष्ट नहीं होगा
बच जाएगा जितना बच सकता है।

 (आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|                                         

                            ********  

One response to “किताब!”

  1. christinenovalarue avatar
    christinenovalarue

    💜

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