हमीं से रंग-ए-बहार!

हमीं से रंग-ए-गुलिस्ताँ हमीं से रंग-ए-बहार,

हमीं को नज़्म-ए-गुलिस्ताँ पे इख़्तियार नहीं|

साहिर लुधियानवी

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