ये किस मक़ाम पे!

ये किस मक़ाम पे पहुँचा दिया ज़माने ने,

कि अब हयात पे तेरा भी इख़्तियार नहीं|   

साहिर लुधियानवी

One response to “ये किस मक़ाम पे!”

  1. christinenovalarue avatar
    christinenovalarue

    💙

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