ए’तिबार नहीं!

तुम्हारे अहद-ए-वफ़ा को मैं अहद क्या समझूँ,

मुझे ख़ुद अपनी मोहब्बत पे ए’तिबार नहीं|

साहिर लुधियानवी

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