खोलें क्या स्कूल मियाँ!

खेलने दें उन्हें इश्क़ की बाज़ी खेलेंगे तो सीखेंगे,

‘क़ैस’ की या ‘फ़रहाद’ की ख़ातिर खोलें क्या स्कूल मियाँ|

इब्न-ए-इंशा

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