होगा तिरा उसूल मियाँ!

अहल-ए-वफ़ा से बात न करना होगा तिरा उसूल मियाँ,

हम क्यूँ छोड़ें उन गलियों के फेरों का मामूल मियाँ|

इब्न-ए-इंशा

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