अहल-ए-वफ़ा से बात न करना होगा तिरा उसूल मियाँ,
हम क्यूँ छोड़ें उन गलियों के फेरों का मामूल मियाँ|
इब्न-ए-इंशा
A sky full of cotton beads like clouds
अहल-ए-वफ़ा से बात न करना होगा तिरा उसूल मियाँ,
हम क्यूँ छोड़ें उन गलियों के फेरों का मामूल मियाँ|
इब्न-ए-इंशा
Leave a comment