जंगल जंगल फूल मियाँ

यूँही तो नहीं दश्त में पहुँचे यूँही तो नहीं जोग लिया,

बस्ती बस्ती काँटे देखे जंगल जंगल फूल मियाँ|

इब्न-ए-इंशा

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