सनम है तो मुझे क्या!

पत्थर न पड़ें गर सर-ए-बाज़ार तो कहना,

तू मोतरिफ़-ए-हुस्न-ए-सनम है तो मुझे क्या|

क़तील शिफ़ाई

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