आँखों में अफ़्साने थे!

ज़िद्दी वहशी अल्लहड़ चंचल मीठे लोग रसीले लोग,

होंट उनके ग़ज़लों के मिसरे आँखों में अफ़्साने थे|

इब्न-ए-इंशा

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