आज मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि और ग़ज़ल लेखक स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी की एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ|
उनकी कुछ रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं|
लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी की यह ग़ज़ल –

आदमी हर तरह लाचार है प्यारे भाई
और क्या ख़ाक समाचार है प्यारे भाई
गुंडई में बड़ी रफ़्तार है प्यारे भाई
सिर्फ़ सौजन्य गिरफ़्तार है प्यारे भाई
भष्ट आचार यहाँ सिर पे चढ़ा जादू है
धुन रहा शीश सदाचार है प्यारे भाई
नाचना, कूदना, मंचों पे चढ़ा जादू है
अब विदूषक ही कलाकार है प्यारे भाई
मौत के घूँट पिए किंतु ज़ुबाँ बन्द रही
खुदकुशी किस क़दर ख़ुद्दार है प्यारे भाई
ज़ोर से चीखिए मत नींद उचट जाएगी
चैन से सो रही सरकार है प्यारे भाई
श्याम को श्वेत करो और कोई रंग भरो
आपके हाथ में अख़बार है प्यारे भाई
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
********
Leave a comment