उधर एक हर्फ़ कि कुश्तनी, यहाँ लाख उज़्र था गुफ़्तनी,
जो कहा तो सुन के उड़ा दिया, जो लिखा तो पढ़ के मिटा दिया|
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
A sky full of cotton beads like clouds
उधर एक हर्फ़ कि कुश्तनी, यहाँ लाख उज़्र था गुफ़्तनी,
जो कहा तो सुन के उड़ा दिया, जो लिखा तो पढ़ के मिटा दिया|
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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