जो रुके तो कोह-ए-गिराँ* थे हम, जो चले तो जाँ से गुज़र गए,
रह-ए-यार हमने क़दम क़दम, तुझे यादगार बना दिया|
*Big Mountain
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
A sky full of cotton beads like clouds
जो रुके तो कोह-ए-गिराँ* थे हम, जो चले तो जाँ से गुज़र गए,
रह-ए-यार हमने क़दम क़दम, तुझे यादगार बना दिया|
*Big Mountain
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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