तुझे यादगार बना दिया!

जो रुके तो कोह-ए-गिराँ* थे हम, जो चले तो जाँ से गुज़र गए,

रह-ए-यार हमने क़दम क़दम, तुझे यादगार बना दिया|   

*Big Mountain

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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