किसे ज़िंदगी है अज़ीज़ अब किसे आरज़ू-ए-शब-ए-तरब,
मगर ऐ निगार-ए-वफ़ा तलब तिरा ए’तिबार कोई तो हो|
अहमद फ़राज़
A sky full of cotton beads like clouds
किसे ज़िंदगी है अज़ीज़ अब किसे आरज़ू-ए-शब-ए-तरब,
मगर ऐ निगार-ए-वफ़ा तलब तिरा ए’तिबार कोई तो हो|
अहमद फ़राज़
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