कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा ‘ग़ालिब’ और कहाँ वाइ’ज़,
पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले|
मिर्ज़ा ग़ालिब
A sky full of cotton beads like clouds
कहाँ मय-ख़ाने का दरवाज़ा ‘ग़ालिब’ और कहाँ वाइ’ज़,
पर इतना जानते हैं कल वो जाता था कि हम निकले|
मिर्ज़ा ग़ालिब
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