अब ख़ुद से बेज़ारी है!

जो चेहरा देखा वो तोड़ा नगर नगर वीरान किए,

पहले औरों से ना-ख़ुश थे अब ख़ुद से बे-ज़ारी है|  

निदा फ़ाज़ली

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