शबाब गर्मी-ए-बज़्म है

तुझे चश्म-ए-मस्त पता भी है कि शबाब गर्मी-ए-बज़्म है,

तुझे चश्म-ए-मस्त ख़बर भी है कि सब आबगीने पिघल गए|

मजरूह सुल्तानपुरी

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