ख़ार निकल गए!

मिरे काम आ गईं आख़िरश यही काविशें यही गर्दिशें,

बढ़ीं इस क़दर मिरी मंज़िलें कि क़दम के ख़ार निकल गए|

मजरूह सुल्तानपुरी

Leave a comment