वो लजाए मेरे सवाल पर कि उठा सके न झुका के सर,
उड़ी ज़ुल्फ़ चेहरे पे इस तरह कि शबों के राज़ मचल गए|
मजरूह सुल्तानपुरी
A sky full of cotton beads like clouds
वो लजाए मेरे सवाल पर कि उठा सके न झुका के सर,
उड़ी ज़ुल्फ़ चेहरे पे इस तरह कि शबों के राज़ मचल गए|
मजरूह सुल्तानपुरी
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