चराग़ राह में जल गए!

मुझे सहल हो गईं मंज़िलें वो हवा के रुख़ भी बदल गए,

तिरा हाथ हाथ में आ गया कि चराग़ राह में जल गए|

मजरूह सुल्तानपुरी

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