हीरे कभी चुन लाए हैं!

संग-रेज़ों* से ख़ज़फ़-पारों** से,

कितने हीरे कभी चुन लाए हैं|

*पत्थर के टुकड़े, **ठीकरी के टुकड़े

जाँ निसार अख़्तर

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