आज एक बार फिर मैं हिन्दी काव्य जगत में गीतों के राजकुमार कहे जाने वाले स्वर्गीय गोपालदास नीरज जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| नीरज जी की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं और उनके बारे में बहुत सी बातें भी लिखी हैं|
लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपालदास नीरज जी की यह कविता –

तुम गए चित्तचोर !
स्वप्न-सज्जित प्यार मेरा,
कल्पना का तार मेरा,
एक क्षण में मधुर निष्ठुर तुम गए झकझोर !
तुम गए चित्तचोर !
हाय ! जाना ही तुम्हें था,
यों रुलाना ही मुझे था
तुम गए प्रिय, पर गए क्यों नहीं ह्रदय मरोड़ !
तुम गए चित्तचोर !
लुट गया सर्वस्व मेरा,
नयन में इतना अँधेरा,
घोर निशि में भी चमकती है नयन की कोर !
तुम गए चित्तचोर !
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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