सब जाने-पहचाने थे!

रात के ख़्वाब सुनाएँ किस को रात के ख़्वाब सुहाने थे,

धुँदले धुँदले चेहरे थे पर सब जाने-पहचाने थे|

इब्न-ए-इंशा

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