रंग-ओ-ख़ुशबू के

रंग-ओ-ख़ुशबू के हुस्न-ओ-ख़ूबी के,

तुमसे थे जितने इस्तिआरे* थे|

*उपमाएं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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