कुछ हुआ भी नहीं!

कभी ये लगता है अब ख़त्म हो गया सब कुछ,

कभी ये लगता है अब तक तो कुछ हुआ भी नहीं|

जावेद अख़्तर

2 responses to “कुछ हुआ भी नहीं!”

  1. ज़िंदगी का सफर अक्सर ऐसा होता है,
    जब तनहाई और हार दिखाई देता है।

    पर याद रखें, जब रात के काले बादल छाए,
    अगले सुबह सूरज फिर से आ जाए।

    जीवन का चक्र हमेशा चलता रहेगा,
    बदलाव की हवा हर तरफ बहेगी।

    इंसान के जीवन में उपाय कम नहीं होते,
    नई उम्मीद की किरणें जगाएँगे।

    हारने की इस सोच से अगर हट जाएं,
    नया जोश और जुनून खुद ही आएगा।

    जीवन के रंगों को अपने दिल में लाएं,
    ख़ुशियों के संग नई कहानी बनाएँ।

    जब लगे कि सब कुछ हार चुका है,
    बस एक कदम और सफलता आपके पास है।

    इस आशा के साथ आगे बढ़े जाएँ,
    क्योंकि आपका अभियान अभी बाकी है।

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