बरसात को इतवार!

आज एक बार फिर से मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ नवगीतकार और मेरे अत्यंत प्रिय कवि स्वर्गीय रमेश रंजक जी का  एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ|  रंजक जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत  

अब चले आओ निमोही द्वार
               पानी थम गया है
मिल गया बरसात को इतवार
               पानी थम गया है

साथ इन चंचल हवाओं के
पंख फैला कर दिशाओं के
उड़ न जाए मिलन का त्यौहार
               पानी थम गया है

धमनियों में स्नेह के बादल
कर रहे ख़ामोश कोलाहल
पलक पर हैं प्यास के अंगार
               पानी थम गया है

धूप गोरी छोड़ कर अम्बर
आ गई छत की मुण्डेरी पर
आइना धर कर रही शृंगार
               पानी थम गया है

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|                                         

                            ********  

One response to “बरसात को इतवार!”

  1. christinenovalarue avatar
    christinenovalarue

    🩵💙

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