फाँद न पाए ढा न सके!

अब तुझसे किस मुँह से कह दें सात समुंदर पार न जा,

बीच की इक दीवार भी हम तो फाँद न पाए ढा न सके|

इब्न-ए-इंशा

One response to “फाँद न पाए ढा न सके!”

  1. davidmoncada77 avatar
    davidmoncada77

    Hola 👋

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