तेरी रहगुज़र भी नहीं!

न जाने किस लिए उम्मीद-वार बैठा हूँ,

इक ऐसी राह पे जो तेरी रहगुज़र भी नहीं|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

Leave a comment