हमारी गुफ़्तुगू की और भी सम्तें बहुत सी हैं,
किसी का दिल दुखाने ही को फिर अपनी ज़बाँ क्यूँ हो|
वसीम बरेलवी
A sky full of cotton beads like clouds
हमारी गुफ़्तुगू की और भी सम्तें बहुत सी हैं,
किसी का दिल दुखाने ही को फिर अपनी ज़बाँ क्यूँ हो|
वसीम बरेलवी
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