कर्णधार तू बना तो!

आज एक बार फिर से मैं अपने समय में हिन्दी काव्य मंचों के एक प्रमुख नाम रहे स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| नेपाली जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की यह कविता  

कर्णधार तू बना तो हाथ में लगाम ले
क्रांति को सफल बना नसीब का न नाम ले

भेद सर उठा रहा मनुष्य को मिटा रहा
गिर रहा समाज आज बाजुओं में थाम ले

त्याग का न दाम ले
दे बदल नसीब तो गरीब का सलाम ले

यह स्वतन्त्रता नहीं कि एक तो अमीर हो
दूसरा मनुष्य तो रहे मगर फकीर हो

न्याय हो तो आरपार एक ही लकीर हो
वर्ग की तनातनी न मानती है चांदनी

चांदनी लिये चला तो घूम हर मुकाम ले
त्याग का न दाम ले
दे बदल नसीब तो गरीब का सलाम ले

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|                                         

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