उस घर में धुआँ क्यूँ हो!

बिखर कर रह गया हमसायगी का ख़्वाब ही वर्ना,

दिए इस घर में रौशन हों तो उस घर में धुआँ क्यूँ हो|

वसीम बरेलवी

Leave a comment