आवाज़ के जुगनू कहाँ!

एहसास की ख़ुशबू कहाँ आवाज़ के जुगनू कहाँ,

ख़ामोश यादों के सिवा घर में रहा कुछ भी नहीं|

बशीर बद्र

Leave a comment