मेरा तेरा ख़ून बहा है!

जब भी कोई तख़्त सजा है मेरा तेरा ख़ून बहा है,

दरबारों की शान-ओ-शौकत मैदानों की शमशीरें हैं|

निदा फ़ाज़ली

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