चंद घरों में ताबीरें हैं!

आज और कल की बात नहीं है सदियों की तारीख़ यही है,

हर आँगन में ख़्वाब हैं लेकिन चंद घरों में ताबीरें हैं|

निदा फ़ाज़ली

One response to “चंद घरों में ताबीरें हैं!”

  1. christinenovalarue avatar
    christinenovalarue

    💗

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