नए रस्ते बनाने में!

पुरानी मंज़िलों का शौक़ तो किसको है बाक़ी,

अब नई हैं मंज़िलें हैं सबके दिल में जिनके अरमाँ,

बना लेना नई मंज़िल न था मुश्किल मगर ऐ दिल,

नए रस्ते बनाने में अभी कुछ दिन लगेंगे|

जावेद अख़्तर

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