अँधेरे ढल गए रौशन हुए मंज़र ज़मीं जागी फ़लक जागा,
तो जैसे जाग उट्ठी ज़िंदगानी,
मगर कुछ याद-ए-माज़ी ओढ़ के सोए हुए लोगों को लगता है जगाने में
अभी कुछ दिन लगेंगे|
जावेद अख़्तर
A sky full of cotton beads like clouds
अँधेरे ढल गए रौशन हुए मंज़र ज़मीं जागी फ़लक जागा,
तो जैसे जाग उट्ठी ज़िंदगानी,
मगर कुछ याद-ए-माज़ी ओढ़ के सोए हुए लोगों को लगता है जगाने में
अभी कुछ दिन लगेंगे|
जावेद अख़्तर
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