कभी हमको यक़ीं था ज़ो’म था दुनिया हमारी जो मुख़ालिफ़ है तो हो जाए,
मगर तुम मेहरबाँ हो,
हमें ये बात वैसे याद तो अब क्या है लेकिन, हाँ इसे यकसर भुलाने में
अभी कुछ दिन लगेंगे|
जावेद अख़्तर
A sky full of cotton beads like clouds
कभी हमको यक़ीं था ज़ो’म था दुनिया हमारी जो मुख़ालिफ़ है तो हो जाए,
मगर तुम मेहरबाँ हो,
हमें ये बात वैसे याद तो अब क्या है लेकिन, हाँ इसे यकसर भुलाने में
अभी कुछ दिन लगेंगे|
जावेद अख़्तर
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