सोसाइटी ही नहीं!

शिर्क* छोड़ा तो सबने छोड़ दिया,

मेरी कोई सोसाइटी ही नहीं|

*मूर्तिपूजा, बहुदेव पूजा

अकबर इलाहाबादी

Leave a comment