दिल के दौलत-ख़ाने में

जाने तू क्या ढूँढ रहा है बस्ती में वीराने में,

लैला तो ऐ क़ैस मिलेगी दिल के दौलत-ख़ाने में|

इब्न-ए-इंशा

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