मुझ से मोहब्बत भी है उसको लेकिन ये दस्तूर है उसका,
ग़ैर से मिलता है हँस हँस कर मुझसे ही शरमाता है|
मुनीर नियाज़ी
A sky full of cotton beads like clouds
मुझ से मोहब्बत भी है उसको लेकिन ये दस्तूर है उसका,
ग़ैर से मिलता है हँस हँस कर मुझसे ही शरमाता है|
मुनीर नियाज़ी
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