मुझसे ही शरमाता है!

मुझ से मोहब्बत भी है उसको लेकिन ये दस्तूर है उसका,

ग़ैर से मिलता है हँस हँस कर मुझसे ही शरमाता है|

मुनीर नियाज़ी

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