कितने यार हैं फिर भी ‘मुनीर’ इस आबादी में अकेला है,
अपने ही ग़म के नश्शे से अपना जी बहलाता है|
मुनीर नियाज़ी
A sky full of cotton beads like clouds
कितने यार हैं फिर भी ‘मुनीर’ इस आबादी में अकेला है,
अपने ही ग़म के नश्शे से अपना जी बहलाता है|
मुनीर नियाज़ी
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