तिरे ग़म को जाँ की तलाश थी तिरे जाँ-निसार चले गए,
तिरी रह में करते थे सर तलब सर-ए-रहगुज़ार चले गए|
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
A sky full of cotton beads like clouds
तिरे ग़म को जाँ की तलाश थी तिरे जाँ-निसार चले गए,
तिरी रह में करते थे सर तलब सर-ए-रहगुज़ार चले गए|
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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