ये नेमत भी कम नहीं!

बे-फ़ाएदा अलम नहीं बे-कार ग़म नहीं,

तौफ़ीक़ दे ख़ुदा तो ये नेमत भी कम नहीं|

जिगर मुरादाबादी

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