नक़्श-ए-क़दम नहीं!

अब इश्क़ उस मक़ाम पे है जुस्तुजू-नवर्द,

साया नहीं जहाँ कोई नक़्श-ए-क़दम नहीं|

जिगर मुरादाबादी

Leave a comment