बज़्म में लाती है हमें!

ज़िंदगी जब भी तिरी बज़्म में लाती है हमें,

ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें|

शहरयार

2 responses to “बज़्म में लाती है हमें!”

  1. हाँ यह बुद्धिमानी है कि जो हम चाहते हैं उससे थोड़ा अधिक कड़वा हो, उसके दौरान स्थिर और जमीन पर टिके रहें। आपके उत्थान ब्लॉग प्रिय आत्मा के लिए धन्यवाद 🙏

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी।

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