ये चराग़ तू ही बुझा न दे!

मेरे दाग़-ए-दिल से है रौशनी इसी रौशनी से है ज़िंदगी,
मुझे डर है ऐ मिरे चारा-गर ये चराग़ तू ही बुझा न दे|

शकील बदायूनी

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