कितने दिन इतराओगे!

‘फ़ैज़’ दिलों के भाग में है घर भरना भी लुट जाना भी,
तुम इस हुस्न के लुत्फ़-ओ-करम पर कितने दिन इतराओगे|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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