कब बरखा बरसाओगे!

बीता दीद उम्मीद का मौसम ख़ाक उड़ती है आँखों में,
कब भेजोगे दर्द का बादल कब बरखा बरसाओगे|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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