
वाइ’ज़ है न ज़ाहिद है नासेह है न क़ातिल है,
अब शहर में यारों की किस तरह बसर होगी|
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
A sky full of cotton beads like clouds

वाइ’ज़ है न ज़ाहिद है नासेह है न क़ातिल है,
अब शहर में यारों की किस तरह बसर होगी|
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
Leave a comment