चराग़ों को आफ़्ताब करूँ!

अब अपनी रूह के छालों का कुछ हिसाब करूँ,
मैं चाहता था चराग़ों को आफ़्ताब करूँ|

राहत इन्दौरी

2 responses to “चराग़ों को आफ़्ताब करूँ!”

    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      हार्दिक धन्यवाद जी।

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