सर पे कोई छत नहीं रही!

खँडहर बचे हुए हैं, इमारत नहीं रही,
अच्छा हुआ कि सर पे कोई छत नहीं रही|

दुष्यंत कुमार

2 responses to “सर पे कोई छत नहीं रही!”

  1. बहुत सुंदर।

    Like

Leave a reply to vermavkv Cancel reply